धीरज रमौल ने कहा - नागरिक समाज की भूमिका उपस्थिति से आगे बढ़कर सहभागिता और साझेदारी तक पहुंचे
नई दिल्ली, 3 नवंबर। नागरिक समाज संगठनों के लिए अनुकूल वातावरण, मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, संसाधनों की उपलब्धता तथा विकास कार्यों में उनकी प्रभावी भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श के लिए वाणी इंडिया द्वारा 3 एवं 4 नवंबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित विश्व युवा केंद्र के संस्कृति सभागार में राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेकर अपने अनुभव, सुझाव और चुनौतियां साझा कर रहे हैं।
इस राष्ट्रीय बैठक में हिमाचल प्रदेश से प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल, समर्पण एसोसिएशन से अनीता शर्मा तथा उत्तराखंड से विलेज डेवलपमेंट सोसायटी के राजबहादूर सैनी सहित विभिन्न राज्यों के सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक का मुख्य उद्देश्य नागरिक समाज संगठनों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों, उनके अधिकारों, कार्यक्षेत्र, संसाधनों तथा भविष्य की रणनीतियों पर सामूहिक संवाद स्थापित करना है।
नागरिक समाज के लिए अनुकूल वातावरण के छह प्रमुख सिद्धांत
कार्यशाला में नागरिक समाज संगठनों के लिए अनुकूल वातावरण के छह प्रमुख सिद्धांतों पर चर्चा की गई। इनमें मौलिक स्वतंत्रताओं का सम्मान एवं संरक्षण, सहायक कानूनी और नियामक व्यवस्था, सुलभ एवं सतत संसाधन, खुली एवं उत्तरदायी सरकार, सहयोगात्मक सार्वजनिक संस्कृति तथा सुरक्षित डिजिटल वातावरण शामिल हैं।
वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक संगठन केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समुदाय की आवाज को मजबूत करने, अधिकारों के संरक्षण, नीतिगत संवाद और जनभागीदारी सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कार्यरत छोटी जमीनी संस्थाओं को संसाधनों, सरकारी परामर्श प्रक्रियाओं और निर्णय लेने के अवसरों तक समान पहुंच मिलना आवश्यक है।
धीरज रमौल ने समुदाय की प्रभावी भागीदारी पर दिया जोर
कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश से प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नागरिक समाज संगठनों की भूमिका केवल बैठकों में उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनकी सहभागिता को प्रभावी साझेदारी तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में समुदाय को सबसे महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए धीरज रमौल ने कहा कि ग्रामीण नागरिकों को अपने गांव में प्रस्तावित, स्वीकृत और जारी विकास कार्यों की स्थिति जानने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी नीतियों के निर्माण में समुदाय और नागरिक समाज संगठनों की आवाज को उचित स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि नीतियां जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप बन सकें और उनका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
नीतिगत निर्णयों में जमीनी संस्थाओं की भागीदारी पर चर्चा
बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने सरकारी योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए। चर्चा में यह बात सामने आई कि कई स्थानों पर सरकार और सामाजिक संस्थाओं के बीच नियमित संवाद तथा परामर्श की व्यवस्था है, लेकिन कई बार सुझावों को वास्तविक निर्णयों और क्रियान्वयन में शामिल करने की प्रक्रिया सीमित रह जाती है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण, जनसुनवाई और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान हो सके और निर्णय लेने वाली संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित हो। सामाजिक संगठनों के सुझावों को केवल बैठकों तक सीमित रखने के बजाय नीतियों के वास्तविक क्रियान्वयन में महत्व देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
संसाधनों और वित्तीय स्थिरता की चुनौतियां
कार्यशाला में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) से संबंधित प्रक्रियाओं, सामाजिक संस्थाओं के लिए विदेशी एवं कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि तक पहुंच, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता तथा जमीनी संगठनों की स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने चिंता व्यक्त की कि संसाधनों की कमी के कारण अनेक छोटी संस्थाओं के कार्यक्षेत्र और गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
वक्ताओं ने जोर दिया कि समुदाय के साथ सीधे जुड़कर काम करने वाली संस्थाओं को विकास प्रक्रिया में उचित स्थान दिया जाना चाहिए। सरकार, सामाजिक संगठनों, समुदाय, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग एवं साझेदारी को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
वर्ष 2026 की रिपोर्ट के लिए अनुभव और सुझाव आमंत्रित
बैठक में “भारत: नागरिक समाज के लिए अनुकूल वातावरण - वर्ष 2025 की देश-केंद्रित रिपोर्ट” के संदर्भ में भी विचार-विमर्श किया गया। इस रिपोर्ट में नागरिक समाज के कार्यक्षेत्र का आकलन छह प्रमुख सिद्धांतों के आधार पर किया गया है। वर्तमान परामर्श बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य वर्ष 2026 की रिपोर्ट के लिए विभिन्न राज्यों के सामाजिक संगठनों के अनुभव, सुझाव और सामूहिक मूल्यांकन प्राप्त करना है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में समुदाय की भागीदारी केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी समुदाय तथा जमीनी संस्थाओं की आवाज को स्थान मिलना चाहिए।
हिमाचल की प्रयास सोसाइटी ने साझा किए जमीनी अनुभव
हिमाचल प्रदेश से प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल की सहभागिता से ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत जमीनी संस्थाओं के अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का अवसर मिला। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने क्षमता निर्माण, सामूहिक प्रयासों और प्रभावी जनपक्षधरता के माध्यम से नागरिक समाज के लिए अधिक सहयोगात्मक, पारदर्शी और सक्षम वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला विभिन्न राज्यों के सामाजिक संगठनों को एक साझा मंच प्रदान कर रही है, जहां वे अपने अनुभवों के आधार पर नागरिक समाज की भूमिका, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर सार्थक संवाद कर रहे हैं।