Sondag 19 Julie 2026

प्रयास सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी रंजीत सिंह टक्कर ने राष्ट्रीय एकता, युवा नेतृत्व एवं समाज सेवा का दिया संदेश

बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती - गुणवत्तापूर्ण नींद बचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक : धीरज रमौल

Climate Change and Sleep Health Report 2026 is an awareness publication by PARAYAS Society (Participatory Action for Rural Advancement and Youth Awareness), Himachal Pradesh, India. The report explains how climate change, rising temperatures, heatwaves, and warmer nights affect human sleep, health, productivity, and overall well-being. It also highlights practical measures for climate action, environmental conservation, water conservation, tree plantation, renewable energy, and sustainable lifestyles. This publication is intended for students, researchers, educators, policymakers, NGOs, and the general public.

Saterdag 18 Julie 2026

आज दुनिया भर में बढ़ती गर्मी, हीटवेव और मौसम के बदलते स्वरूप का एक बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन (Climate Change) माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मानव गतिविधियों से बढ़ने वाली ग्रीनहाउस गैसों के कारण पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हीटवेव अधिक बार, अधिक तीव्र और अधिक समय तक रहने लगी हैं।इस बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा असर लोगों की नींद पर भी पड़ रहा है। दुनिया भर में बहुत से लोग उतनी अच्छी और पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं, जितनी स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक होती है। गर्म रातों में तापमान अधिक होने के कारण लोगों की नींद बार-बार टूटती है और पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। शोधों में भी पाया गया है कि बढ़ती गर्मी के कारण औसतन लोगों की नींद प्रभावित होती है।पर्याप्त नींद न मिलने का असर शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता और उत्पादकता पर पड़ता है। इससे थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है। जब बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित होते हैं, तो इसका असर समाज और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है।यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए समय की मांग है कि हम पर्यावरण संरक्षण, अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और कार्बन उत्सर्जन को कम करने जैसे कदम उठाएँ। यदि आज हम प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और संतुलित भविष्य दे सकेंगे।

आज दुनिया भर में बढ़ती गर्मी, हीटवेव और मौसम के बदलते स्वरूप का एक बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन (Climate Change) माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मानव गतिविधियों से बढ़ने वाली ग्रीनहाउस गैसों के कारण पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हीटवेव अधिक बार, अधिक तीव्र और अधिक समय तक रहने लगी हैं।इस बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा असर लोगों की नींद पर भी पड़ रहा है। दुनिया भर में बहुत से लोग उतनी अच्छी और पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं, जितनी स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक होती है। गर्म रातों में तापमान अधिक होने के कारण लोगों की नींद बार-बार टूटती है और पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। शोधों में भी पाया गया है कि बढ़ती गर्मी के कारण औसतन लोगों की नींद प्रभावित होती है।पर्याप्त नींद न मिलने का असर शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता और उत्पादकता पर पड़ता है। इससे थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है। जब बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित होते हैं, तो इसका असर समाज और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है।यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए समय की मांग है कि हम पर्यावरण संरक्षण, अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और कार्बन उत्सर्जन को कम करने जैसे कदम उठाएँ। यदि आज हम प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और संतुलित भविष्य दे सकेंगे।

हिमाचल का पर्यटन: विकास की दौड़ या विनाश की ओर? : धीरज रमौलसचिव, प्रयास सोसाइटी

प्रयास सोसाइटी के अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी रंजीत सिंह टक्कर ने राष्ट्रीय एकता, युवा नेतृत्व एवं समाज सेवा का दिया संदेश