मिट्टी, जल और पर्यावरण का संरक्षण करके ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भोजन सुनिश्चित किया जा सकता है : धीरज रमौल
सिरमौर, हिमाचल प्रदेश | 16 अक्टूबर 2026
विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर प्रयास सोसाइटी के सचिव श्री धीरज रमौल ने ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा, पौष्टिक आहार, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और किसानों के योगदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि भोजन केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भोजन की गुणवत्ता, ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाना समय की जरूरत
आज जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, मिट्टी की घटती उर्वरता, जलस्रोतों पर बढ़ते दबाव और खेती की बढ़ती लागत के कारण किसानों के सामने अनेक चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है।
जैविक खेती में जैविक खाद, कम्पोस्ट, फसल चक्र और जैविक कीट प्रबंधन जैसी विधियों को अपनाया जाता है। प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों, मिट्टी के स्वास्थ्य और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
श्री रमौल ने कहा कि इन खेती पद्धतियों को स्थानीय परिस्थितियों और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, खेती में बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिल सकती है।
इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और कृषि उत्पादों के उचित बाजार की सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
पौष्टिक भोजन से ही स्वस्थ समाज का निर्माण
खाद्य सुरक्षा के साथ पोषण सुरक्षा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को संतुलित और पौष्टिक आहार मिलना चाहिए।
ग्रामीण परिवारों को अपने भोजन में दालें, मौसमी फल-सब्जियां, अनाज, दूध और स्थानीय रूप से उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
घरों में पोषण वाटिका विकसित करना, स्थानीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देना और भोजन की बर्बादी रोकना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों और युवाओं में पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने से कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
किसानों का योगदान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़
किसान कठिन परिस्थितियों में मेहनत करके देश के लिए अनाज, फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद उपलब्ध कराते हैं। किसानों का योगदान केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में किसान सीमित कृषि भूमि, मौसम की अनिश्चितता, सिंचाई की कठिनाइयों और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान जैसी समस्याओं के बीच खेती करते हैं।
ऐसे में किसानों को उचित मूल्य, बाजार तक पहुंच, तकनीकी सहायता और कृषि आधारित आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि महिला किसानों के योगदान को भी उचित सम्मान और पहचान मिलनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की जरूरत
हिमाचल प्रदेश में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप पारंपरिक फसलों, दालों, मोटे अनाज, फल-सब्जियों और विविध कृषि प्रणालियों को प्रोत्साहित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।
वर्षा जल संचयन, जलस्रोतों का संरक्षण, कम्पोस्ट निर्माण, स्थानीय बीजों का संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना पहाड़ी कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने ग्रामीण समुदायों, स्वयं सहायता समूहों, किसान संगठनों और युवाओं से खाद्य सुरक्षा, पोषण और पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
प्रयास सोसाइटी ने किया जागरूकता का आह्वान
विश्व खाद्य दिवस पर संदेश देते हुए श्री धीरज रमौल ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ जल, पौष्टिक भोजन और समृद्ध किसान एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित खाद्य भविष्य सुनिश्चित करने हेतु टिकाऊ कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और किसानों के सम्मान को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा:
“खाद्य सुरक्षा केवल अन्न उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ समाज, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की खुशहाली से जुड़ा हुआ संकल्प है।”
प्रयास सोसाइटी ग्रामीण विकास, जन-जागरूकता और समुदाय की भागीदारी के माध्यम से खाद्य सुरक्षा, पोषण, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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प्रयास सोसाइटी के बारे में
PARAYAS Society (Participatory Action for Rural Advancement and Youth Awareness) हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण विकास, जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ आजीविका के क्षेत्र में कार्यरत सामाजिक संस्था है।
संस्था का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को जागरूक एवं सशक्त बनाना तथा सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है।
संपर्क:
प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society)
V.P.O. Bharog Baneri, Tehsil Dadahu, District Sirmaur, Himachal Pradesh – 173022
ईमेल: societyparayas1@gmail.com