स्टाफ की कमी, बरसात में टूटती तारों और क्षतिग्रस्त पोलों से बढ़ी परेशानी; धीरज रमौल ने सरकार से नियमित कटाई-छंटाई, पर्याप्त कर्मचारियों और स्थायी समाधान की मांग की
सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के ददाहू और धारटीधार क्षेत्र में पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से बिजली की समस्या लगातार बनी हुई है। बार-बार बिजली गुल होने, बरसात के दौरान तारें टूटने और बिजली के पोल क्षतिग्रस्त होने तथा खराबी को ठीक करने में लगने वाले लंबे समय के कारण क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अभी तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि बिजली की समस्या आने पर आम लोग अक्सर बिजली विभाग के फील्ड कर्मचारियों, जेई और एसडीओ को फोन करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि विभाग के कर्मचारी उपलब्ध संसाधनों के बीच अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं और लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते हैं। इसलिए फील्ड में काम करने वाले छोटे कर्मचारियों को दोष देना समस्या का समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि असली समस्या व्यवस्था और पर्याप्त स्टाफ की कमी से जुड़ी हुई है। ददाहू और धारटीधार जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के मौसम में तेज हवाओं, भारी बारिश और पेड़ों के गिरने के कारण कई बार बिजली की तारें टूट जाती हैं तथा पोल भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण खराबी को ठीक करने में काफी समय लग जाता है।
धीरज रमौल ने कहा कि पहले बिजली की तारों के आसपास पेड़ों की बढ़ी हुई टहनियों की समय-समय पर कटाई-छंटाई की जाती थी, ताकि पेड़ों की शाखाएं तारों के संपर्क में आकर बिजली आपूर्ति में बाधा न बनें। लेकिन पिछले करीब पौने चार वर्षों से इस व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियां बिजली की तारों तक पहुंच चुकी हैं, जिससे बरसात और तेज हवाओं के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि समस्या केवल खराबी होने के बाद उसे ठीक करने की नहीं, बल्कि खराबी को रोकने के लिए पहले से तैयारी करने की है। यदि बिजली की तारों के आसपास पेड़ों की नियमित कटाई-छंटाई, पुराने एवं कमजोर पोलों की समय-समय पर जांच तथा आवश्यकतानुसार मरम्मत और बदलाव किया जाए, तो बिजली की कई समस्याओं को पहले ही रोका जा सकता है।
धीरज रमौल ने कहा कि ददाहू और धारटीधार क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग नौकरी, मजदूरी, कृषि और अन्य दैनिक कार्यों पर निर्भर हैं। शाम के समय बिजली चले जाने के बाद कई बार रातभर बिजली बहाल नहीं होती, जिससे घरेलू कार्यों, विद्यार्थियों की पढ़ाई, दुकानदारों, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में जब कहीं तार टूटती है या पोल गिरता है तो सीमित कर्मचारियों पर ही उसे ठीक करने का दबाव बढ़ जाता है। यदि विभाग के पास पर्याप्त तकनीकी स्टाफ, लाइनमैन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों तो ऐसी आपात स्थिति में बिजली आपूर्ति को कम समय में बहाल किया जा सकता है।
धीरज रमौल ने प्रदेश सरकार से सवाल किया कि पिछले करीब 40 महीनों में ददाहू और धारटीधार क्षेत्र की बिजली समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? उन्होंने कहा कि सरकार और बिजली विभाग को केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करने की व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय क्षेत्र की बिजली व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं और क्षेत्रवासियों की ओर से मुख्यमंत्री तथा बिजली विभाग के मंत्री को एक मांग पत्र भेजा जाए, जिसमें बिजली की तारों के आसपास पेड़ों की नियमित और समयबद्ध कटाई-छंटाई के लिए स्थायी व्यवस्था एवं नियमित टेंडर लगाने, पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति/उपलब्धता सुनिश्चित करने, बरसात से पहले बिजली लाइनों और पोलों का निरीक्षण करने, कमजोर पोलों को बदलने तथा आपातकालीन स्थिति में त्वरित मरम्मत दल उपलब्ध करवाने की मांग की जाए।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बरसात से पहले प्री-मानसून तैयारी को अनिवार्य किया जाना चाहिए। संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां अतिरिक्त स्टाफ और आवश्यक सामग्री उपलब्ध रखी जाए, ताकि तार टूटने या पोल गिरने की स्थिति में लोगों को लंबे समय तक बिजली संकट का सामना न करना पड़े।
धीरज रमौल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी कर्मचारी या अधिकारी को दोषी ठहराना नहीं है। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और विभाग के उच्च स्तर पर ऐसी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे कर्मचारियों की कमी दूर हो और बिजली की समस्या का स्थायी समाधान हो।
उन्होंने कहा, “यदि समय रहते पेड़ों की टहनियों की कटाई-छंटाई, बिजली लाइनों और पोलों की नियमित निगरानी तथा पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाए, तो बिजली की कई बाधाओं को पहले ही रोका जा सकता है। बरसात में तार टूटने या पोल गिरने की स्थिति में भी पर्याप्त स्टाफ होने से बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जा सकेगी।”
प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने प्रदेश सरकार और बिजली विभाग से मांग की कि सिरमौर जिला के ददाहू और धारटीधार क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही बिजली समस्या को गंभीरता से लिया जाए। स्टाफ की कमी को दूर करने, बिजली लाइनों की नियमित देखरेख, पेड़ों की कटाई-छंटाई, कमजोर पोलों को बदलने तथा बरसात के दौरान त्वरित मरम्मत व्यवस्था को मजबूत कर लोगों को स्थायी एवं प्रभावी राहत प्रदान की जाए।
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