Saterdag 18 Julie 2026
Vrydag 17 Julie 2026
प्राकृतिक खेती: किसानों की समृद्धि और स्वस्थ भविष्य की दिशालेखक: धीरज रमौलसचिव, प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society)आज के समय में बढ़ती खेती लागत, मिट्टी की उर्वरता में कमी, जल संकट और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग ने कृषि के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। ऐसे समय में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक टिकाऊ, किफायती और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर उभर रही है।प्राकृतिक खेती का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग से स्वस्थ एवं सुरक्षित खाद्य उत्पादन करना है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और खेती की लागत भी कम होती है।हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य में प्राकृतिक खेती का विशेष महत्व है। यहाँ छोटे और सीमांत किसान स्थानीय संसाधनों, देशी गाय आधारित कृषि पद्धतियों तथा पारंपरिक ज्ञान का उपयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलता है।प्राकृतिक खेती के साथ-साथ मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसे मंडुवा, कोदो, कुट्टू, जौ, मक्का और अन्य पारंपरिक फसलों का उत्पादन भी बढ़ाना आवश्यक है। ये फसलें कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं, पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं।सरकार, कृषि विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं और किसानों को मिलकर प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, किसान जागरूकता कार्यक्रम तथा स्थानीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना चाहिए। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं को कृषि से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।प्राकृतिक खेती केवल खेती करने का तरीका नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की एक सोच है। यदि हम आज इस दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ भोजन, सुरक्षित पर्यावरण और समृद्ध कृषि विरासत दे सकेंगे।प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society) के बारे मेंप्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society) हिमाचल प्रदेश में कार्यरत एक स्वैच्छिक संस्था है, जिसका मुख्य कार्यालय जिला सिरमौर में स्थित है। संस्था ग्रामीण विकास, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, आजीविका संवर्धन, महिला सशक्तिकरण तथा सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य समुदाय की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।संपर्क करें:📧 Email: societyparayas1@gmail.com📞 Mobile: +91 8219852185#PARAYASSociety #NaturalFarming #Millets #HimachalPradesh #Sirmaur #OrganicFarming #RuralDevelopment #SustainableAgriculture #Environment #ClimateAction
हिमाचल के सूखते प्राकृतिक जल स्रोत: अब नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियाँ करेंगी संघर्षलेखक: धीरज रमौलसचिव, प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society)हिमाचल प्रदेश अपनी नदियों, झरनों, बावड़ियों, चश्मों और प्राकृतिक जल स्रोतों के लिए जाना जाता है। कभी गाँवों की जीवनरेखा रहे ये जल स्रोत आज तेजी से सूखते जा रहे हैं। यह केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, खेती, पशुपालन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।सिरमौर सहित हिमाचल के अनेक क्षेत्रों में वर्षों पुराने प्राकृतिक चश्मों का जल प्रवाह लगातार कम हो रहा है। कई स्थानों पर पारंपरिक जल स्रोत पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर हैं। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, जंगलों की कटाई, वर्षा के बदलते स्वरूप, भूजल का अत्यधिक दोहन तथा अनियंत्रित बोरवेल जैसी अनेक चुनौतियाँ जिम्मेदार हैं।प्राकृतिक जल स्रोत केवल पीने के पानी का साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारी कृषि, जैव विविधता, वन्यजीवों और स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट और अधिक गहरा सकता है।इस दिशा में सरकार, पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को मिलकर कार्य करना होगा। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण, अधिक से अधिक पौधारोपण, पारंपरिक बावड़ियों और चश्मों का पुनर्जीवन तथा भूजल के अनियंत्रित दोहन पर प्रभावी नियंत्रण समय की आवश्यकता है।हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है कि वह पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करे और अपने आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों की सफाई एवं संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाए। यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो सूखते जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सकता है।जल है तो जीवन है। इसलिए आज लिया गया एक छोटा-सा संरक्षण का संकल्प आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव बन सकता है।प्रयास सोसाइटी के बारे मेंप्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society) ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती, आजीविका संवर्धन तथा सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्यरत एक स्वैच्छिक संस्था है। संस्था का उद्देश्य समुदाय की सहभागिता से सतत विकास को बढ़ावा देना है।संपर्क:📧 societyparayas1@gmail.com#PARAYASSociety #WaterConservation #SaveSprings #HimachalPradesh #JalSanrakshan #ClimateChange #RuralDevelopment #Environment
प्राकृतिक खेती एवं लघु अनाजों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता : धीरज रमौल सिरमौर। हिम आरआरए नेटवर्क द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने प्राकृतिक खेती, देशी बीजों के संरक्षण तथा लघु अनाजों (मिलेट्स) के उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान किया। बैठक में कृषि क्षेत्र के अनेक विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं संसाधन व्यक्तियों (रिसोर्स पर्सनों) ने भाग लेकर टिकाऊ एवं आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।बैठक के दौरान प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, लघु अनाजों के उत्पादन में वृद्धि, देशी एवं पारंपरिक बीजों के संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि यह किसानों की उत्पादन लागत को भी कम करती है। वहीं, मोटे अनाज (मिलेट्स) पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।इस अवसर पर प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि किसानों को अधिक से अधिक देशी एवं स्थानीय बीजों का उपयोग करना चाहिए तथा अपने स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि देशी बीज हमारी कृषि परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं और इनके संरक्षण से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, खेती की लागत घटेगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव विविधता भी सुरक्षित रहेगी।धीरज रमौल ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती और लघु अनाजों को बढ़ावा देना केवल किसानों के हित में ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और सतत विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी किसानों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा संबंधित विभागों से इस दिशा में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती, देशी बीजों के संरक्षण तथा लघु अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
Donderdag 14 Desember 2023
Action Strategy
PARAYAS Society (Participatory Action for Rural Advancement and Youth Awareness) works directly with local communities and action groups by involving the people especially women Organizations, youth, Students, Teachers, Folk Artiste and marginal farmer in Sirmaur, Una, Solan, Shimla and Dehradun Districts of Himachal Pradesh and Uttrakhand.
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