Vrydag 17 Julie 2026

हिमाचल के सूखते प्राकृतिक जल स्रोत: अब नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ियाँ करेंगी संघर्षलेखक: धीरज रमौलसचिव, प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society)हिमाचल प्रदेश अपनी नदियों, झरनों, बावड़ियों, चश्मों और प्राकृतिक जल स्रोतों के लिए जाना जाता है। कभी गाँवों की जीवनरेखा रहे ये जल स्रोत आज तेजी से सूखते जा रहे हैं। यह केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, खेती, पशुपालन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।सिरमौर सहित हिमाचल के अनेक क्षेत्रों में वर्षों पुराने प्राकृतिक चश्मों का जल प्रवाह लगातार कम हो रहा है। कई स्थानों पर पारंपरिक जल स्रोत पूरी तरह समाप्त होने की कगार पर हैं। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, जंगलों की कटाई, वर्षा के बदलते स्वरूप, भूजल का अत्यधिक दोहन तथा अनियंत्रित बोरवेल जैसी अनेक चुनौतियाँ जिम्मेदार हैं।प्राकृतिक जल स्रोत केवल पीने के पानी का साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारी कृषि, जैव विविधता, वन्यजीवों और स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट और अधिक गहरा सकता है।इस दिशा में सरकार, पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को मिलकर कार्य करना होगा। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण, अधिक से अधिक पौधारोपण, पारंपरिक बावड़ियों और चश्मों का पुनर्जीवन तथा भूजल के अनियंत्रित दोहन पर प्रभावी नियंत्रण समय की आवश्यकता है।हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है कि वह पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करे और अपने आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों की सफाई एवं संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाए। यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो सूखते जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा सकता है।जल है तो जीवन है। इसलिए आज लिया गया एक छोटा-सा संरक्षण का संकल्प आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव बन सकता है।प्रयास सोसाइटी के बारे मेंप्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society) ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती, आजीविका संवर्धन तथा सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्यरत एक स्वैच्छिक संस्था है। संस्था का उद्देश्य समुदाय की सहभागिता से सतत विकास को बढ़ावा देना है।संपर्क:📧 societyparayas1@gmail.com#PARAYASSociety #WaterConservation #SaveSprings #HimachalPradesh #JalSanrakshan #ClimateChange #RuralDevelopment #Environment

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