Vrydag 17 Julie 2026
प्राकृतिक खेती एवं लघु अनाजों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता : धीरज रमौल सिरमौर। हिम आरआरए नेटवर्क द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने प्राकृतिक खेती, देशी बीजों के संरक्षण तथा लघु अनाजों (मिलेट्स) के उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान किया। बैठक में कृषि क्षेत्र के अनेक विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं संसाधन व्यक्तियों (रिसोर्स पर्सनों) ने भाग लेकर टिकाऊ एवं आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।बैठक के दौरान प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, लघु अनाजों के उत्पादन में वृद्धि, देशी एवं पारंपरिक बीजों के संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि यह किसानों की उत्पादन लागत को भी कम करती है। वहीं, मोटे अनाज (मिलेट्स) पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।इस अवसर पर प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि किसानों को अधिक से अधिक देशी एवं स्थानीय बीजों का उपयोग करना चाहिए तथा अपने स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि देशी बीज हमारी कृषि परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं और इनके संरक्षण से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, खेती की लागत घटेगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जैव विविधता भी सुरक्षित रहेगी।धीरज रमौल ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती और लघु अनाजों को बढ़ावा देना केवल किसानों के हित में ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और सतत विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी किसानों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा संबंधित विभागों से इस दिशा में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती, देशी बीजों के संरक्षण तथा लघु अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
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