Sondag 26 Julie 2026
बरसात का मौसम जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का सुनहरा अवसर: धीरज रमौलसिरमौर। प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि वर्तमान बरसात का मौसम सूख चुके प्राकृतिक जल स्रोतों (चश्मों) को पुनर्जीवित करने का सबसे उपयुक्त समय है। यदि आज सामूहिक प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में पानी की कमी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में प्राकृतिक चश्मे और नौले सूख चुके हैं, वहां स्थानीय लोग, ग्राम पंचायतें, युवा मंडल, महिला मंडल और सामाजिक संगठन मिलकर वर्षा जल को उन जल स्रोतों तक पहुंचाने के लिए छोटे-छोटे रिचार्ज गड्ढे, कंटूर ट्रेंच, सोख्ता गड्ढे और जल संरक्षण के अन्य उपाय अपनाएं। इससे वर्षा का पानी जमीन में समाकर भूजल स्तर बढ़ाएगा और सूखे जल स्रोतों के दोबारा जीवित होने की संभावना बढ़ेगी।धीरज रमौल ने विशेष रूप से उन लोगों से भी आग्रह किया जिन्होंने अपने खेतों या घरों में बोरवेल लगाए हैं कि वे अपने बोरवेल का भी वर्षा जल से रिचार्ज करने की व्यवस्था करें। यदि प्रत्येक बोरवेल के साथ रिचार्ज पिट बनाया जाए तो भूजल स्तर में सुधार होगा और भविष्य में पानी की उपलब्धता बनी रहेगी।उन्होंने कहा कि केवल नए बोरवेल खोदना समस्या का समाधान नहीं है। यदि हम भूजल निकालते हैं तो उसे वापस धरती में पहुंचाने की जिम्मेदारी भी हमारी है। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा, तभी आने वाली पीढ़ियों को पर्याप्त और स्वच्छ पानी मिल सकेगा।प्रयास सोसाइटी ने सभी ग्राम पंचायतों, सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा आम नागरिकों से अपील की है कि इस बरसात में "हर बूंद को धरती में पहुंचाने" का संकल्प लें और अपने गांव के सूख चुके प्राकृतिक जल स्रोतों तथा बोरवेलों को रिचार्ज करने के लिए सामूहिक अभियान चलाएं।
Saterdag 25 Julie 2026
हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में उद्योगों की कमी विकास के लिए बड़ी चुनौती: धीरज रमौलसिरमौर। प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी बड़े और मध्यम उद्योगों का अभाव है, जिसके कारण स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर पलायन करना पड़ रहा है। यदि संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन भविष्य में और गंभीर समस्या बन सकता है।धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल की पहचान प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यटन, बागवानी, कृषि और सांस्कृतिक विरासत से है, लेकिन केवल इन्हीं क्षेत्रों पर निर्भर रहकर प्रदेश के सभी युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना संभव नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक उत्पादों और आधुनिक तकनीक को जोड़कर छोटे एवं मध्यम स्तर के उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।उन्होंने कहा कि सेब, कीवी, मशरूम, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, शहद, मोटे अनाज, हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र, बांस तथा वन आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण (Processing) के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय किसानों और स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ेगी तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा।रमौल ने कहा कि उद्योगों की स्थापना के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क, बिजली, इंटरनेट, परिवहन, भंडारण, कौशल विकास और आसान ऋण जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत करना होगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसे उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए जिनसे जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष औद्योगिक नीति तैयार की जाए, जिसमें स्थानीय उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहन दिया जाए। साथ ही जिला स्तर पर "वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट" जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल का विकास तभी संभव है जब पर्यटन, कृषि, बागवानी और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उद्योगों का भी संतुलित विकास किया जाए। इससे पलायन रुकेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रदेश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
Vrydag 24 Julie 2026
प्रकृति के साथ खिलवाड़ मानवता के भविष्य के लिए गंभीर खतरा: धीरज रमौलसिरमौर। प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा है कि अंधाधुंध विकास, व्यक्तिगत स्वार्थ और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण पर्यावरण का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। इसका परिणाम आज ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, भीषण गर्मी, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा, भूस्खलन तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे।धीरज रमौल ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन वह प्रकृति के संरक्षण के साथ संतुलित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़कों, भवनों और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जा रही है, जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो रहा है और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है। वहीं, उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित कर मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।उन्होंने कहा कि भूजल का अत्यधिक दोहन, प्राकृतिक जलस्रोतों की उपेक्षा, अवैज्ञानिक खनन तथा संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन को और अधिक गंभीर बना सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी, जंगलों में आग, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और मौसम के बदलते स्वरूप स्पष्ट संकेत हैं कि प्रकृति लगातार चेतावनी दे रही है।प्रयास सोसाइटी के सचिव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल एवं ऊर्जा संरक्षण अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जुड़ने की अपील की।धीरज रमौल ने सरकार से भी मांग की कि अवैध वनों की कटाई, अनियंत्रित खनन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर सख्ती से रोक लगाई जाए। प्रत्येक विकास परियोजना में पर्यावरणीय मानकों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा प्राकृतिक जलस्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रभावी एवं दीर्घकालिक नीतियां लागू की जाएं।उन्होंने कहा कि यदि आज प्रकृति की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में पर्यावरणीय संकट और भी विकराल रूप ले सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि "प्रकृति बचेगी तभी मानवता का भविष्य सुरक्षित रहेगा।"
Sondag 19 Julie 2026
Climate Change and Sleep Health Report 2026 is an awareness publication by PARAYAS Society (Participatory Action for Rural Advancement and Youth Awareness), Himachal Pradesh, India. The report explains how climate change, rising temperatures, heatwaves, and warmer nights affect human sleep, health, productivity, and overall well-being. It also highlights practical measures for climate action, environmental conservation, water conservation, tree plantation, renewable energy, and sustainable lifestyles. This publication is intended for students, researchers, educators, policymakers, NGOs, and the general public.
Saterdag 18 Julie 2026
आज दुनिया भर में बढ़ती गर्मी, हीटवेव और मौसम के बदलते स्वरूप का एक बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन (Climate Change) माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मानव गतिविधियों से बढ़ने वाली ग्रीनहाउस गैसों के कारण पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे हीटवेव अधिक बार, अधिक तीव्र और अधिक समय तक रहने लगी हैं।इस बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा असर लोगों की नींद पर भी पड़ रहा है। दुनिया भर में बहुत से लोग उतनी अच्छी और पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं, जितनी स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक होती है। गर्म रातों में तापमान अधिक होने के कारण लोगों की नींद बार-बार टूटती है और पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। शोधों में भी पाया गया है कि बढ़ती गर्मी के कारण औसतन लोगों की नींद प्रभावित होती है।पर्याप्त नींद न मिलने का असर शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, कार्यक्षमता और उत्पादकता पर पड़ता है। इससे थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है। जब बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित होते हैं, तो इसका असर समाज और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है।यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए समय की मांग है कि हम पर्यावरण संरक्षण, अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और कार्बन उत्सर्जन को कम करने जैसे कदम उठाएँ। यदि आज हम प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और संतुलित भविष्य दे सकेंगे।
Teken in op:
Plasings (Atom)
विज्ञान के साथ संस्कार और प्रकृति का सम्मान ही बनाएगा हिमाचल का उज्ज्वल भविष्य : धीरज रमौल
विज्ञान के साथ संस्कार और प्रकृति का सम्मान ही बनाएगा हिमाचल का उज्ज्वल भविष्य : धीरज रमौल आधुनिक तकनीक अपनाएं, लेकिन अपनी जड़ों से रिश्ता न...
-
Vision To achieved the goals of voluntary aspects through integrated development of rural community. Mission To achieve the vis...