Saterdag 25 Julie 2026

हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में उद्योगों की कमी विकास के लिए बड़ी चुनौती: धीरज रमौलसिरमौर। प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी बड़े और मध्यम उद्योगों का अभाव है, जिसके कारण स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर पलायन करना पड़ रहा है। यदि संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक विकास पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो पहाड़ों से लगातार हो रहा पलायन भविष्य में और गंभीर समस्या बन सकता है।धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल की पहचान प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यटन, बागवानी, कृषि और सांस्कृतिक विरासत से है, लेकिन केवल इन्हीं क्षेत्रों पर निर्भर रहकर प्रदेश के सभी युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना संभव नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक उत्पादों और आधुनिक तकनीक को जोड़कर छोटे एवं मध्यम स्तर के उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।उन्होंने कहा कि सेब, कीवी, मशरूम, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, शहद, मोटे अनाज, हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्र, बांस तथा वन आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण (Processing) के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय किसानों और स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ेगी तथा युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलेगा।रमौल ने कहा कि उद्योगों की स्थापना के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क, बिजली, इंटरनेट, परिवहन, भंडारण, कौशल विकास और आसान ऋण जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत करना होगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसे उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए जिनसे जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष औद्योगिक नीति तैयार की जाए, जिसमें स्थानीय उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं को प्रोत्साहन दिया जाए। साथ ही जिला स्तर पर "वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट" जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल का विकास तभी संभव है जब पर्यटन, कृषि, बागवानी और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उद्योगों का भी संतुलित विकास किया जाए। इससे पलायन रुकेगा, युवाओं को रोजगार मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रदेश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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