धीरज रमौल, सचिव, प्रयास सोसाइटी
आज जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन और बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यदि समय रहते प्रकृति के संरक्षण के लिए ठोस और सामूहिक प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, सूखा, बाढ़, भूस्खलन, अत्यधिक गर्मी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ेगा।
हिमाचल प्रदेश जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर राज्य में भी जल स्रोतों का सूखना, अनियोजित विकास, वनों की कटाई और बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना आवश्यक है।
प्रयास सोसाइटी का मानना है कि प्रत्येक नागरिक यदि अपने जीवन में छोटे-छोटे पर्यावरणीय कदम उठाए, तो बड़े बदलाव संभव हैं। हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए, वर्षा जल संचयन को अपनाना चाहिए, प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा करनी चाहिए, प्लास्टिक के उपयोग को कम करना चाहिए और स्वच्छता को अपनी आदत बनाना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण के लिए हम क्या कर सकते हैं?
अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ और उनकी देखभाल करें।
प्राकृतिक जल स्रोतों, नदियों और तालाबों को स्वच्छ रखें।
वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें।
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का उपयोग कम करें।
जल और बिजली की बचत करें।
अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें।
बच्चों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें।
प्रकृति केवल हमारी आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व का आधार है। यदि आज हम जल, जंगल और जमीन की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य मिल सकेगा।
प्रयास सोसाइटी वर्षों से पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण और जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। आइए, हम सभी मिलकर प्रकृति संरक्षण को जन आंदोलन बनाएं और एक हरित, स्वच्छ एवं सुरक्षित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
"प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।"
— धीरज रमौल
सचिव, प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society)
जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश