Vrydag 31 Julie 2026

Tree Plantation Is Not Just an Event - It Is Our Responsibility Towards the Future PARAYAS Society believes that environmental protection is not only the responsibility of the government but also a shared duty of every citizen. With this vision, the Society regularly organizes tree plantation drives involving local communities, youth, students, and volunteers.A tree is much more than greenery. It provides clean air, helps conserve water, supports biodiversity, and creates a healthier environment for future generations. Our commitment does not end with planting trees; we place equal importance on their protection, care, and long-term survival.Let us all pledge to make "One Person - One Tree" a people's movement and fulfill our responsibility towards nature.PARAYAS Society"Protect Nature - Secure Humanity."

बरसात की हर बूंद बने भविष्य की पूंजी, प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए जनभागीदारी जरूरी: धीरज रमौल सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत देती है, वहीं दूसरी ओर यह प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर भी लेकर आती है। यदि इस वर्षा जल का वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण किया जाए तो भविष्य में पेयजल संकट, भूजल स्तर में गिरावट तथा सूखते प्राकृतिक चश्मों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह बात प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने वर्षा जल संरक्षण पर जारी एक प्रेस वक्तव्य में कही।धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, पहाड़ी जलधाराओं, बावड़ियों, नौलों, कुओं और प्राकृतिक चश्मों से रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, वनों की कटाई, कंक्रीट का बढ़ता दायरा तथा वर्षा जल के संरक्षण की उपेक्षा के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। कई गांवों में लोग आज भी गर्मियों के दौरान पेयजल संकट का सामना करते हैं, जबकि बरसात के दिनों में करोड़ों लीटर पानी बिना उपयोग के बहकर नदियों में चला जाता है।उन्होंने कहा कि यदि आज वर्षा जल को धरती में समाने का अवसर दिया जाए तो यही पानी आने वाले महीनों में प्राकृतिक चश्मों, कुओं और भूजल को जीवन देगा। इसलिए यह समय केवल बारिश का आनंद लेने का नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का है।धीरज रमौल ने प्रदेश सरकार, पंचायत प्रतिनिधियों, वन विभाग, जल शक्ति विभाग तथा ग्रामीण समुदायों से अपील की कि प्रत्येक पंचायत अपने क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों का सर्वेक्षण कर उनकी सफाई, संरक्षण और पुनर्जीवन की कार्ययोजना तैयार करे। जहां-जहां प्राकृतिक चश्मे सूख चुके हैं, वहां वर्षा जल को रिचार्ज करने के लिए छोटे-छोटे जल संचयन ढांचे विकसित किए जाएं। इससे आने वाले वर्षों में जल उपलब्धता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होगा।उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने घरों, संस्थानों या खेतों में बोरवेल लगाए हैं, वे वर्षा जल रिचार्ज प्रणाली अपनाएं। इससे भूजल स्तर सुधरेगा और भविष्य में पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। साथ ही खेतों में मेड़बंदी, छोटे तालाब, सोख्ता गड्ढे तथा पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।धीरज रमौल ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि हर परिवार वर्षा जल संरक्षण का एक छोटा कदम भी उठाए तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा। उन्होंने युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों, विद्यालयों और महाविद्यालयों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण अभियान चलाएं और लोगों को प्राकृतिक जल स्रोतों के महत्व के बारे में जागरूक करें।उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम सभाओं में जल संरक्षण को स्थायी एजेंडा बनाया जाए और प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान प्राकृतिक चश्मों, बावड़ियों और जलधाराओं की सामुदायिक सफाई का अभियान चलाया जाए। इससे न केवल जल स्रोत सुरक्षित होंगे बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।प्रयास सोसाइटी ने घोषणा की कि संस्था आने वाले समय में विभिन्न गांवों में प्राकृतिक जल स्रोतों की स्थिति का अध्ययन, जन-जागरूकता कार्यक्रम तथा वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर अभियान चलाएगी। संस्था का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।अंत में धीरज रमौल ने प्रदेशवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा, "यदि हम इस बरसात में वर्षा की हर बूंद को बचाने का संकल्प लें, तो आने वाली पीढ़ियों को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। प्रकृति हमें हर वर्ष जीवन का यह अनमोल उपहार देती है। आइए, हम सभी मिलकर हिमाचल के प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करें, वर्षा जल को धरती में उतारें और जल संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाएं। यही सच्ची पर्यावरण सेवा और भविष्य के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।"

Woensdag 29 Julie 2026



Vision
To achieved the goals of voluntary aspects through integrated development of rural community.
Mission
To achieve the vision is to make the base line survey of the operational area and implement the relevant application to meet the overall requirement of the community.

Dinsdag 28 Julie 2026

प्राकृतिक खेती एवं लघु अनाजों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता : धीरज रमौल सिरमौर । प्रयास सोसाइटी द्वारा हिम आरआरए नेटवर्क के सहयोग से जिला सिरमौर की ग्राम पंचायत भरोग बनेड़ी के ग्राम भरोग बनेड़ी में प्राकृतिक खेती, देशी बीजों के संरक्षण तथा लघु अनाजों (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापक डोर-टू-डोर कृषि सर्वेक्षण एवं जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान सोसाइटी के कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर किसानों से संवाद स्थापित किया तथा प्राकृतिक खेती, आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था और पारंपरिक बीज संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।सर्वेक्षण के दौरान किसानों से खरीफ, रबी एवं जायद मौसम में उगाई जाने वाली फसलों, प्राकृतिक खेती अपनाने की स्थिति, उपलब्ध कृषि भूमि, देशी बीजों की उपलब्धता, सिंचाई के स्रोत तथा स्थानीय बीज संरक्षण की परंपराओं से संबंधित जानकारी एकत्रित की गई। सर्वेक्षण में यह पाया गया कि क्षेत्र के किसान आज भी अनेक पारंपरिक एवं स्थानीय फसलों का संरक्षण कर रहे हैं तथा स्वयं तैयार किए गए बीजों का उपयोग करते हैं। साथ ही अधिकांश किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं और पारंपरिक कृषि ज्ञान को संरक्षित करने में रुचि दिखा रहे हैं।सर्वेक्षण में किसानों द्वारा उगाई जाने वाली प्रमुख खरीफ फसलों में मक्का, धान, सोयाबीन, उड़द, मूंग, लोबिया, तिल, अदरक, हल्दी, अरबी, खीरा, लौकी, तुरई, कद्दू, टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी तथा चलाई शामिल हैं। वहीं रबी फसलों में गेहूँ, जौ, राजमा, मसूर, चना, काला चना, सरसों, राई, धनिया, मेथी, लहसुन, प्याज, मटर तथा कुल्थी जैसी फसलें प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त कई किसानों द्वारा कश्मीरी लहसुन, बड़ी इलायची, कलजीरी, अलसी, मंडुवा (रागी), भट्ट, फरासबीन तथा अन्य स्थानीय किस्मों का भी संरक्षण किया जा रहा है।सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि अधिकांश किसान स्वयं संरक्षित बीज (Own Saved Seed), स्थानीय किसानों के बीच बीज आदान-प्रदान (Local Farmer Exchange) तथा सामुदायिक बीज साझाकरण प्रणाली (Community Seed Sharing System) के माध्यम से देशी बीजों का संरक्षण कर रहे हैं। यह परंपरा क्षेत्र की कृषि जैव विविधता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और भविष्य में सीड विलेज (Seed Village) की अवधारणा को मजबूत करने में भी सहायक होगी।प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि प्राकृतिक खेती, देशी बीजों का संरक्षण और लघु अनाजों को बढ़ावा देना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती पर बढ़ती निर्भरता के कारण भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है, जबकि प्राकृतिक खेती कम लागत, बेहतर मिट्टी स्वास्थ्य और सुरक्षित खाद्य उत्पादन का प्रभावी विकल्प है।उन्होंने कहा कि मिलेट्स (लघु अनाज) जैसे मंडुवा, जौ, कुल्थी, भट्ट तथा अन्य पारंपरिक फसलें न केवल पोषण सुरक्षा प्रदान करती हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम हैं। ऐसे अनाज कम पानी में बेहतर उत्पादन देते हैं तथा पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।धीरज रमौल ने किसानों से अधिक से अधिक देशी एवं स्थानीय बीजों का उपयोग करने, अपने स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने तथा बीज संरक्षण की पारंपरिक व्यवस्था को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि किसान स्वयं बीज तैयार करेंगे तो खेती की लागत कम होगी, बाहरी बीजों पर निर्भरता घटेगी और स्थानीय कृषि जैव विविधता सुरक्षित रहेगी।उन्होंने बताया कि प्रयास सोसाइटी द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण के आधार पर हिम आरआरए नेटवर्क (HIM RRA Network) के सहयोग से प्राकृतिक खेती, सीड विलेज विकास, स्थानीय बीज बैंक की स्थापना, किसानों के क्षमता विकास, जल संरक्षण तथा जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में आगामी समय में भी संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसान संवाद, बीज संरक्षण अभियान तथा जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी, ताकि ग्रामीण समुदाय आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली को अपनाने के लिए प्रेरित हो सके।अभियान के अंत में किसानों एवं ग्रामीणों ने प्राकृतिक खेती अपनाने, देशी बीजों के संरक्षण, लघु अनाजों के उत्पादन में वृद्धि तथा आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। प्रयास सोसाइटी एवं हिम आरआरए नेटवर्क ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के सर्वेक्षण, प्रशिक्षण एवं जनजागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि सिरमौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल तथा जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा मिल सके।

Maandag 27 Julie 2026

विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने का दिया संदेश, स्वस्थ जीवन अपनाने का किया आह्वान सिरसा । राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कीर्ति नगर, सिरसा में आयोजित नशा जागरूकता कार्यक्रम में प्रयास सोसाइटी के स्वयंसेवक रणजीत सिंह ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करते हुए उन्हें स्वस्थ, अनुशासित एवं समाजसेवा से जुड़े जीवन को अपनाने के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर रणजीत सिंह ने कहा कि आज नशा युवाओं के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है। यदि समय रहते युवा वर्ग इस बुराई से नहीं बचा तो इसका दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास पर भी पड़ेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से खेल, शिक्षा, योग, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं सामाजिक सेवा में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।उन्होंने विद्यार्थियों को "Say No to Drug, Say Yes to Life", "Say No to Drug, Say Yes to Games" तथा "Say No to Drug, Say Yes to Social Services" का संदेश देते हुए नशा मुक्त सिरसा, नशा मुक्त हरियाणा एवं नशा मुक्त भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।रणजीत सिंह ने बताया कि नशे की लत मानसिक तनाव, अवसाद, याददाश्त में कमी, शारीरिक कमजोरी, हृदय, मस्तिष्क एवं यकृत को नुकसान, आर्थिक संकट, पारिवारिक कलह तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में गिरावट जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म देती है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को स्वयं नशे से दूर रहना चाहिए तथा अपने मित्रों और परिवार के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने तथा समाज में नशा मुक्ति का संदेश फैलाने का संकल्प लिया। प्रयास सोसाइटी की ओर से कहा गया कि संस्था भविष्य में भी युवाओं के बीच ऐसे जनजागरूकता अभियान चलाती रहेगी, ताकि स्वस्थ, जागरूक एवं नशामुक्त समाज का निर्माण किया जा सके।

विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने का दिया संदेश, स्वस्थ जीवन अपनाने का किया आह्वान

विज्ञान के साथ संस्कार और प्रकृति का सम्मान ही बनाएगा हिमाचल का उज्ज्वल भविष्य : धीरज रमौल

विज्ञान के साथ संस्कार और प्रकृति का सम्मान ही बनाएगा हिमाचल का उज्ज्वल भविष्य : धीरज रमौल आधुनिक तकनीक अपनाएं, लेकिन अपनी जड़ों से रिश्ता न...