Vrydag 31 Julie 2026
बरसात की हर बूंद बने भविष्य की पूंजी, प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने के लिए जनभागीदारी जरूरी: धीरज रमौल सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत देती है, वहीं दूसरी ओर यह प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर भी लेकर आती है। यदि इस वर्षा जल का वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण किया जाए तो भविष्य में पेयजल संकट, भूजल स्तर में गिरावट तथा सूखते प्राकृतिक चश्मों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह बात प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने वर्षा जल संरक्षण पर जारी एक प्रेस वक्तव्य में कही।धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, पहाड़ी जलधाराओं, बावड़ियों, नौलों, कुओं और प्राकृतिक चश्मों से रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास, वनों की कटाई, कंक्रीट का बढ़ता दायरा तथा वर्षा जल के संरक्षण की उपेक्षा के कारण अनेक प्राकृतिक जल स्रोत धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। कई गांवों में लोग आज भी गर्मियों के दौरान पेयजल संकट का सामना करते हैं, जबकि बरसात के दिनों में करोड़ों लीटर पानी बिना उपयोग के बहकर नदियों में चला जाता है।उन्होंने कहा कि यदि आज वर्षा जल को धरती में समाने का अवसर दिया जाए तो यही पानी आने वाले महीनों में प्राकृतिक चश्मों, कुओं और भूजल को जीवन देगा। इसलिए यह समय केवल बारिश का आनंद लेने का नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का है।धीरज रमौल ने प्रदेश सरकार, पंचायत प्रतिनिधियों, वन विभाग, जल शक्ति विभाग तथा ग्रामीण समुदायों से अपील की कि प्रत्येक पंचायत अपने क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों का सर्वेक्षण कर उनकी सफाई, संरक्षण और पुनर्जीवन की कार्ययोजना तैयार करे। जहां-जहां प्राकृतिक चश्मे सूख चुके हैं, वहां वर्षा जल को रिचार्ज करने के लिए छोटे-छोटे जल संचयन ढांचे विकसित किए जाएं। इससे आने वाले वर्षों में जल उपलब्धता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होगा।उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने घरों, संस्थानों या खेतों में बोरवेल लगाए हैं, वे वर्षा जल रिचार्ज प्रणाली अपनाएं। इससे भूजल स्तर सुधरेगा और भविष्य में पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। साथ ही खेतों में मेड़बंदी, छोटे तालाब, सोख्ता गड्ढे तथा पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।धीरज रमौल ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। यदि हर परिवार वर्षा जल संरक्षण का एक छोटा कदम भी उठाए तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा। उन्होंने युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों, विद्यालयों और महाविद्यालयों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण अभियान चलाएं और लोगों को प्राकृतिक जल स्रोतों के महत्व के बारे में जागरूक करें।उन्होंने सुझाव दिया कि ग्राम सभाओं में जल संरक्षण को स्थायी एजेंडा बनाया जाए और प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान प्राकृतिक चश्मों, बावड़ियों और जलधाराओं की सामुदायिक सफाई का अभियान चलाया जाए। इससे न केवल जल स्रोत सुरक्षित होंगे बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।प्रयास सोसाइटी ने घोषणा की कि संस्था आने वाले समय में विभिन्न गांवों में प्राकृतिक जल स्रोतों की स्थिति का अध्ययन, जन-जागरूकता कार्यक्रम तथा वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर अभियान चलाएगी। संस्था का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।अंत में धीरज रमौल ने प्रदेशवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा, "यदि हम इस बरसात में वर्षा की हर बूंद को बचाने का संकल्प लें, तो आने वाली पीढ़ियों को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। प्रकृति हमें हर वर्ष जीवन का यह अनमोल उपहार देती है। आइए, हम सभी मिलकर हिमाचल के प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करें, वर्षा जल को धरती में उतारें और जल संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाएं। यही सच्ची पर्यावरण सेवा और भविष्य के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।"
Teken in op:
Plaas opmerkings (Atom)
दिल्ली में राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला में हिमाचल की प्रयास सोसाइटी ने लिया भाग
धीरज रमौल ने कहा - नागरिक समाज की भूमिका उपस्थिति से आगे बढ़कर सहभागिता और साझेदारी तक पहुंचे नई दिल्ली, 3 नवंबर। नागरिक समाज संगठनों के लिए...
-
Smoke reportedly emanating from an industrial unit in Rampur Bharapur raises concerns over air quality, environment and public health; PARAY...
-
Vision To achieved the goals of voluntary aspects through integrated development of rural community. Mission To achieve the vis...
Geen opmerkings nie:
Plaas 'n opmerking