मोबाइल की लत, तनाव, अकेलापन और नशे जैसी समस्याओं से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी : धीरज रमौल
सिरमौर, 10 अक्टूबर । विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society), हिमाचल प्रदेश के सचिव धीरज रमौल ने आमजन से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने तथा एक संवेदनशील, सहयोगी और खुशहाल समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जिस तेजी से जीवनशैली बदल रही है, उसी के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
धीरज रमौल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रयास करते हैं, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिए भी समय देना चाहिए। मानसिक परेशानियों को कमजोरी समझना या उन्हें छिपाना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि लोग अपनी भावनाओं को समझें, परेशानियों पर खुलकर बात करें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने से न हिचकिचाएं।
मोबाइल फोन का बढ़ता उपयोग भी चिंता का विषय
धीरज रमौल ने कहा कि मोबाइल फोन आज हमारी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। शिक्षा, सूचना और संचार के क्षेत्र में इसके अनेक लाभ हैं, लेकिन इसका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग चिंता का विषय बन सकता है। घंटों सोशल मीडिया पर समय बिताना, देर रात तक रील्स देखना, ऑनलाइन गेम में व्यस्त रहना तथा सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना हमारी नींद, एकाग्रता और मानसिक सुकून को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि कई बार परिवार के सदस्य एक ही कमरे में बैठे होते हैं, लेकिन आपस में बातचीत करने के बजाय अपने-अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। इसका असर पारिवारिक संवाद और आपसी संबंधों पर भी पड़ सकता है। इसलिए मोबाइल का उपयोग आवश्यकतानुसार और सीमित समय के लिए करना चाहिए। बच्चों और युवाओं को भी मोबाइल के सकारात्मक उपयोग के साथ-साथ वास्तविक जीवन में खेलकूद, पढ़ाई, सामाजिक गतिविधियों और पारिवारिक संवाद के लिए प्रेरित करना जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अन्य कारणों को भी समझना जरूरी
प्रयास सोसाइटी के सचिव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर केवल मोबाइल फोन का ही प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि इसके पीछे अनेक सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं। लगातार तनाव, बेरोजगारी, आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक विवाद, अकेलापन, पर्याप्त नींद न लेना, नशे की लत, दूसरों से तुलना करना, अपमान, भेदभाव और बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज बच्चों और युवाओं को समझने की विशेष जरूरत है। कई बार बच्चे अपनी परेशानियां माता-पिता को नहीं बता पाते, जबकि युवा रोजगार, भविष्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर तनाव में रहते हैं। ऐसे समय में उन्हें डांटने, उनकी तुलना दूसरों से करने या उनकी समस्याओं को छोटा समझने के बजाय उनकी बात धैर्यपूर्वक सुननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर मुस्कुराता चेहरा जरूरी नहीं कि अंदर से खुश हो। इसलिए अपने आसपास के लोगों की भावनाओं को समझना, उनके साथ संवाद बनाए रखना और जरूरत के समय सहयोग देना हम सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है।
नशे से दूरी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान
धीरज रमौल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए नशे से दूर रहना, पर्याप्त नींद लेना, नियमित शारीरिक गतिविधियां करना, प्रकृति के साथ समय बिताना और परिवार एवं मित्रों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक तनाव, चिंता, उदासी या अन्य मानसिक परेशानियां बनी रहती हैं और उसका दैनिक जीवन प्रभावित होने लगता है, तो उसे योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता रखनी चाहिए। उनका मजाक उड़ाना, उन्हें कमजोर समझना या समाज से अलग करना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी स्थिति को समझने और सुधार की दिशा में कदम उठाने का साहस है।
हर व्यक्ति की बात सुनें, सम्मान दें और सहयोग करें
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “Lived experiences heard: real voices, real change” का उल्लेख करते हुए धीरज रमौल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का अनुभव करने वाले लोगों की बात सुनना, उनके अनुभवों का सम्मान करना और उनकी जरूरतों को समझना सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालयों, कार्यस्थलों और सामाजिक समूहों में ऐसा वातावरण बनाएं, जहां प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी डर या झिझक के अपनी परेशानी साझा कर सके। बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाकर समाज में सहयोग और विश्वास की भावना मजबूत की जा सकती है।
प्रयास सोसाइटी का संदेश
धीरज रमौल ने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि लोगों के स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन से भी मापी जाती है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल से दूर रहकर परिवार के साथ बिताएं, बच्चों और युवाओं की बात ध्यान से सुनें, जरूरतमंद व्यक्ति का सहारा बनें तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों और भेदभाव को दूर करने में सहयोग करें।
उन्होंने कहा, “आइए, इस विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर हम संकल्प लें कि किसी की परेशानी का मजाक नहीं उड़ाएंगे, जरूरतमंद की बात ध्यान से सुनेंगे और कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनेंगे। क्योंकि कभी-कभी किसी को दिया गया थोड़ा-सा समय, अपनापन और सहयोग उसके जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा सकता है।”