Saterdag 10 Oktober 2026

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर प्रयास सोसाइटी की अपील: मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलें, अपनों को समय दें और मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान

मोबाइल की लत, तनाव, अकेलापन और नशे जैसी समस्याओं से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी : धीरज रमौल

सिरमौर, 10 अक्टूबर । विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर प्रयास सोसाइटी (PARAYAS Society), हिमाचल प्रदेश के सचिव धीरज रमौल ने आमजन से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने तथा एक संवेदनशील, सहयोगी और खुशहाल समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में जिस तेजी से जीवनशैली बदल रही है, उसी के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
धीरज रमौल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रयास करते हैं, उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिए भी समय देना चाहिए। मानसिक परेशानियों को कमजोरी समझना या उन्हें छिपाना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि लोग अपनी भावनाओं को समझें, परेशानियों पर खुलकर बात करें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने से न हिचकिचाएं।

मोबाइल फोन का बढ़ता उपयोग भी चिंता का विषय

धीरज रमौल ने कहा कि मोबाइल फोन आज हमारी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। शिक्षा, सूचना और संचार के क्षेत्र में इसके अनेक लाभ हैं, लेकिन इसका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग चिंता का विषय बन सकता है। घंटों सोशल मीडिया पर समय बिताना, देर रात तक रील्स देखना, ऑनलाइन गेम में व्यस्त रहना तथा सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करना हमारी नींद, एकाग्रता और मानसिक सुकून को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि कई बार परिवार के सदस्य एक ही कमरे में बैठे होते हैं, लेकिन आपस में बातचीत करने के बजाय अपने-अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। इसका असर पारिवारिक संवाद और आपसी संबंधों पर भी पड़ सकता है। इसलिए मोबाइल का उपयोग आवश्यकतानुसार और सीमित समय के लिए करना चाहिए। बच्चों और युवाओं को भी मोबाइल के सकारात्मक उपयोग के साथ-साथ वास्तविक जीवन में खेलकूद, पढ़ाई, सामाजिक गतिविधियों और पारिवारिक संवाद के लिए प्रेरित करना जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अन्य कारणों को भी समझना जरूरी

प्रयास सोसाइटी के सचिव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर केवल मोबाइल फोन का ही प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि इसके पीछे अनेक सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं। लगातार तनाव, बेरोजगारी, आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक विवाद, अकेलापन, पर्याप्त नींद न लेना, नशे की लत, दूसरों से तुलना करना, अपमान, भेदभाव और बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज बच्चों और युवाओं को समझने की विशेष जरूरत है। कई बार बच्चे अपनी परेशानियां माता-पिता को नहीं बता पाते, जबकि युवा रोजगार, भविष्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर तनाव में रहते हैं। ऐसे समय में उन्हें डांटने, उनकी तुलना दूसरों से करने या उनकी समस्याओं को छोटा समझने के बजाय उनकी बात धैर्यपूर्वक सुननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर मुस्कुराता चेहरा जरूरी नहीं कि अंदर से खुश हो। इसलिए अपने आसपास के लोगों की भावनाओं को समझना, उनके साथ संवाद बनाए रखना और जरूरत के समय सहयोग देना हम सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है।
नशे से दूरी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान
धीरज रमौल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए नशे से दूर रहना, पर्याप्त नींद लेना, नियमित शारीरिक गतिविधियां करना, प्रकृति के साथ समय बिताना और परिवार एवं मित्रों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक तनाव, चिंता, उदासी या अन्य मानसिक परेशानियां बनी रहती हैं और उसका दैनिक जीवन प्रभावित होने लगता है, तो उसे योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता रखनी चाहिए। उनका मजाक उड़ाना, उन्हें कमजोर समझना या समाज से अलग करना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी स्थिति को समझने और सुधार की दिशा में कदम उठाने का साहस है।

हर व्यक्ति की बात सुनें, सम्मान दें और सहयोग करें

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “Lived experiences heard: real voices, real change” का उल्लेख करते हुए धीरज रमौल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का अनुभव करने वाले लोगों की बात सुनना, उनके अनुभवों का सम्मान करना और उनकी जरूरतों को समझना सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आमजन से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालयों, कार्यस्थलों और सामाजिक समूहों में ऐसा वातावरण बनाएं, जहां प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी डर या झिझक के अपनी परेशानी साझा कर सके। बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाकर समाज में सहयोग और विश्वास की भावना मजबूत की जा सकती है।
प्रयास सोसाइटी का संदेश
धीरज रमौल ने कहा कि समाज की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि लोगों के स्वस्थ, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन से भी मापी जाती है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रतिदिन कुछ समय मोबाइल से दूर रहकर परिवार के साथ बिताएं, बच्चों और युवाओं की बात ध्यान से सुनें, जरूरतमंद व्यक्ति का सहारा बनें तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों और भेदभाव को दूर करने में सहयोग करें।
उन्होंने कहा, “आइए, इस विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर हम संकल्प लें कि किसी की परेशानी का मजाक नहीं उड़ाएंगे, जरूरतमंद की बात ध्यान से सुनेंगे और कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनेंगे। क्योंकि कभी-कभी किसी को दिया गया थोड़ा-सा समय, अपनापन और सहयोग उसके जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा सकता है।”
प्रयास सोसाइटी का संदेश है - स्वस्थ मन, सशक्त युवा और संवेदनशील समाज ही खुशहाल भविष्य की मजबूत नींव हैं।

Woensdag 07 Oktober 2026

Industrial Smoke Concern Spreads from Doon to DharatiDhar, Residents of Eight Panchayats Worried

Smoke reportedly emanating from an industrial unit in Rampur Bharapur raises concerns over air quality, environment and public health; PARAYAS Society calls for scientific assessment and effective action

Sirmaur, October 7: Concerns are growing among residents of the Doon and DharatiDhar areas of Sirmaur district, Himachal Pradesh, over smoke reportedly coming from an industrial unit located in the Rampur Bharapur area of Paonta Sahib.
According to local residents, the smoke appears to spread with the direction of the wind and may be reaching surrounding areas. This has raised concerns regarding air quality, environmental safety and the potential impact on public health.
The concern has reportedly extended to parts of the DharatiDhar region, with residents of around eight Gram Panchayats expressing apprehension about the possible spread of smoke into rural areas.

Concern Over Possible Health Impact

Residents are particularly concerned about the possible impact of prolonged exposure to polluted air on children, elderly people and individuals vulnerable to respiratory problems.
People in the affected areas have called for proper monitoring and scientific assessment rather than relying only on visual observations. The actual health impact, concentration of pollutants and extent of smoke dispersion can only be established through scientific testing and air-quality monitoring.
PARAYAS Society Calls for Scientific Investigation
Dheeraj Ramoul, Secretary of PARAYAS Society, has expressed concern over the issue and urged the concerned authorities to conduct an impartial and scientific assessment.
He said that clean air and a safe environment are essential for every citizen and that the authorities should determine the actual level of air pollution and the areas potentially affected by the smoke.
PARAYAS Society has urged the government and concerned departments to:
Conduct an inspection of the industrial unit as per applicable pollution-control and environmental standards.
Monitor air quality in nearby and potentially affected areas.
Assess the direction and extent of smoke dispersion.
Verify whether prescribed environmental norms are being followed.
Take appropriate action if any violation is established.
Ensure adequate pollution-control and emission-management systems at the industrial unit.
Environmental Protection Must Go Hand in Hand with Development
Dheeraj Ramoul said that industrial development is important for employment and economic growth, but it must go hand in hand with environmental protection and public health.
He emphasized that concerns raised by local communities should be addressed through transparent monitoring, scientific evidence and appropriate regulatory action.
PARAYAS Society has been working to promote environmental protection, water conservation and awareness about local environmental issues. The organization has stated that it will continue to raise matters affecting communities and the environment before the concerned authorities.
Need for Air Quality Monitoring in Doon and DharatiDhar
The concerns emerging from the Doon and DharatiDhar areas highlight the need for reliable air-quality data.
Regular monitoring can help determine the actual level of pollutants, identify potential sources and establish whether air-quality standards are being maintained.
Residents are therefore seeking clarity from the authorities through proper scientific assessment rather than assumptions.

Conclusion

The concerns regarding smoke from the Rampur Bharapur industrial area have brought attention to the importance of air-quality monitoring and environmental compliance in the wider Doon–DharatiDhar region.
Industrial growth and environmental protection need to move together. Ensuring clean air, a safe environment and public health should remain an important priority for sustainable development.

Dheeraj Ramoul
Secretary, PARAYAS Society
Sirmaur, Himachal Pradesh


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SEO Title: Industrial Smoke Concern from Doon to DharatiDhar, Sirmaur

Description: Residents of Doon and DharatiDhar in Sirmaur raise concerns over smoke from Rampur Bharapur industrial area. PARAYAS Society seeks scientific air-quality assessment and environmental action.

Woensdag 30 September 2026

स्थानीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता : धीरज रमौल

सिरमौर, 30 सितंबर। अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के अवसर पर प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि अनुवाद केवल एक भाषा के शब्दों को दूसरी भाषा में बदलने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, समाजों और विचारों को आपस में जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे विविधतापूर्ण राज्य में स्थानीय भाषाओं, बोलियों, लोक साहित्य, लोक परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान का विशेष महत्व है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीढ़ियों से संचित जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, औषधीय पौधों तथा स्थानीय संसाधनों से संबंधित ज्ञान को सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान, तकनीक और आधुनिक ज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी को सरल हिन्दी तथा स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध करवाने से किसानों, विद्यार्थियों, युवाओं और ग्रामीण समुदायों को इसका अधिक लाभ मिल सकता है। इसी प्रकार ग्रामीण समाज के पारंपरिक अनुभवों और स्थानीय ज्ञान को भी व्यापक स्तर तक पहुंचाने में अनुवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
धीरज रमौल ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान, संस्कृति और विरासत का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए स्थानीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण के साथ-साथ विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाषा के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान जितना अधिक होगा, समाज में समझ, सहयोग और आपसी जुड़ाव भी उतना ही मजबूत होगा।
उन्होंने युवाओं, शिक्षकों, साहित्यकारों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों से आह्वान किया कि वे स्थानीय इतिहास, संस्कृति, लोक परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को लिखित एवं डिजिटल रूप में सुरक्षित करने के प्रयास करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ी रह सकें।
अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के अवसर पर प्रयास सोसाइटी ने सभी भाषा विशेषज्ञों, अनुवादकों, साहित्यकारों, शिक्षकों और भाषा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के योगदान को सराहा तथा समाज में भाषायी समन्वय और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का संदेश दिया।

Dinsdag 29 September 2026

बारिश के बदलते स्वरूप के बीच जल संरक्षण पर गंभीरता से काम करने की जरूरत : प्रयास सोसाइटी


प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के साथ वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की आवश्यकता

सिरमौर 29 सितंबर। बारिश के बदलते स्वरूप और जलवायु परिवर्तन के बीच आने वाले समय के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर प्रयास सोसाइटी ने जल संरक्षण के कार्यों को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। संस्था का कहना है कि वर्षा जल का अधिक से अधिक संरक्षण, प्राकृतिक जलस्रोतों का पुनर्भरण और ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक भागीदारी आज समय की महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है।
प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अनेक गांवों की पेयजल व्यवस्था प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर है। ऐसे में बारिश के पानी को सीधे बह जाने देने के बजाय उसे जमीन में उतारने और प्राकृतिक जलस्रोतों के रिचार्ज के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें पंचायतों, महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, किसानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। गांव स्तर पर छोटे-छोटे जल संरक्षण कार्य जैसे रिचार्ज पिट, कंटूर ट्रेंच, चेक डैम, वर्षा जल संचयन और जलस्रोतों के आसपास पौधरोपण लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
धीरज रमौल ने कहा कि संस्था पिछले कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोतों, वर्षा जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनजागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से कार्य कर रही है। बदलती परिस्थितियों को देखते हुए अब इन प्रयासों को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अपने आसपास मौजूद बावड़ियों, धारों, नालों, नौलों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखें तथा जलस्रोतों के आसपास कूड़ा-कचरा न डालें। साथ ही बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए घरों और खेतों के स्तर पर भी छोटे-छोटे उपाय अपनाए जाएं।
प्रयास सोसाइटी के अनुसार जल संरक्षण का सबसे प्रभावी तरीका स्थानीय परिस्थितियों और समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सामूहिक प्रयास करना है। यदि वर्षा जल का संरक्षण और प्राकृतिक जलस्रोतों का पुनर्भरण नियमित रूप से किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में भविष्य की जल चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Maandag 28 September 2026

PARAYAS Society Volunteer Ranjit Singh Plants Saplings in Salasar, Rajasthan on Shaheed Bhagat Singh’s Birth Anniversary


“Shaheed Bhagat Singh Continues to Inspire the Youth” : Ranjit Singh

Salasar, Rajasthan, September 28 : On the occasion of the 119th birth anniversary of Shaheed-e-Azam Sardar Bhagat Singh, PARAYAS Society, Himachal Pradesh volunteer and social worker Ranjit Singh planted saplings at Salasar, Rajasthan, paying tribute to the great revolutionary and freedom fighter.
Ranjit Singh dedicated the plantation activity to the sacrifice and contribution of Shaheed Bhagat Singh towards the nation and appealed to people to plant more trees and actively participate in environmental conservation.
He said that Shaheed Bhagat Singh was not only one of the great revolutionaries of India's freedom struggle but also a lasting source of inspiration for the youth. His courage, sacrifice, patriotism and commitment to the nation continue to motivate young people to work for a better society and a better future.
Ranjit Singh said that Bhagat Singh was born on September 28, 1907, in Banga village of Lyallpur, in present-day Pakistan. The revolutionary environment around him and the prevailing conditions in the country had a deep impact on his personality from an early age. The Jallianwala Bagh massacre further strengthened his determination to fight against British rule.
He said Bhagat Singh played an important role in the Naujawan Bharat Sabha and was associated with the Hindustan Socialist Republican Association (HSRA). Along with being a fearless revolutionary, he was also a writer, thinker and progressive intellectual. His famous slogan “Inquilab Zindabad” continues to inspire generations.
Ranjit Singh said Bhagat Singh sacrificed his life for the freedom of the country and was martyred on March 23, 1931, along with Rajguru and Sukhdev.
He said that planting a sapling on the birth anniversary of Shaheed Bhagat Singh is not merely an environmental activity but also a commitment towards future generations. Just as the freedom fighters sacrificed their present for the future of the nation, today's generation must take responsibility for protecting nature and natural resources.
He appealed to people to plant trees and ensure their proper care and survival. He said trees are essential for clean air, water conservation, biodiversity and a healthy environment.
On the occasion, Ranjit Singh gave the message:
🌳 Plant more trees.
🌿 Protect the environment, protect the Earth.
🌱 Increase greenery, secure the future.
Salute to Shaheed-e-Azam Bhagat Singh.
Inquilab Zindabad. 🇮🇳🌹

PARAYAS Society, Himachal Pradesh

Vrydag 25 September 2026

स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर के लिए हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी : धीरज रमौल

सिरमौर 25 सितंबर। ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ (SSSS 5.0) अभियान के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरोग-बनेड़ी में आयोजित पर्यावरण संरक्षण प्रतिज्ञा कार्यक्रम के बाद प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने देशवासियों एवं प्रदेशवासियों से समुद्र, नदियों, झरनों और सभी जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
धीरज रमौल ने कहा कि समुद्र केवल तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन और पर्यावरण से उनका सीधा संबंध है। समुद्र पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता, जलवायु और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि समुद्रों को स्वच्छ रखने की शुरुआत हमारे घर, गांव और स्थानीय जल स्रोतों से होती है। यदि नदियों, नालों, खड्डों, झरनों और अन्य जल स्रोतों में कचरा एवं प्लास्टिक जाने से रोका जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण आज जल स्रोतों और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती है। प्रत्येक नागरिक को एकल-उपयोग प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करने, कचरे का उचित निपटान करने और अपने आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
धीरज रमौल ने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाया जा सकता है। बच्चे और युवा भविष्य के जिम्मेदार नागरिक हैं और उनमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने देश एवं प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि “स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर का संदेश केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह संदेश हिमाचल के पहाड़ी गांवों के छोटे जलस्रोतों से लेकर देश की नदियों और समुद्रों तक पहुंचना चाहिए। जल की प्रत्येक धारा को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।”
उन्होंने कहा कि प्रयास सोसाइटी आगे भी विद्यार्थियों, शिक्षकों, समुदाय और आम नागरिकों की भागीदारी से जल संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण में कमी, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देती रहेगी।
धीरज रमौल ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे केवल पर्यावरण संरक्षण की प्रतिज्ञा न लें, बल्कि उसे अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाएं। यही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण की मजबूत नींव होगी।

Woensdag 23 September 2026

‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान के तहत प्रयास सोसाइटी ने भरोग-बनेड़ी विद्यालय में दिलाई पर्यावरण संरक्षण की प्रतिज्ञा

सिरमौर/भरोग-बनेड़ी, 23 सितंबर। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के सौजन्य से चलाए जा रहे ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ (SSSS 5.0) अभियान के अंतर्गत बुधवार को श्री शिवानंद रमौल स्मारक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरोग-बनेड़ी में प्रतिज्ञा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रयास सोसाइटी द्वारा किया गया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या अंजना कुमारी जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में 143 विद्यार्थियों तथा 14 स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों एवं स्टाफ ने समुद्रों, तटों तथा जल निकायों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, जल स्रोतों में कचरा न डालने, एकल-उपयोग प्लास्टिक के इस्तेमाल से बचने तथा कचरे का उचित निपटान करने की प्रतिज्ञा ली।
‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ (SSSS 5.0) अभियान का मुख्य उद्देश्य समुद्री संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना है। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, विशेषज्ञों, कर्मचारियों तथा आम जनता सहित समाज के विभिन्न वर्गों की जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए समुद्री स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही प्लास्टिक एवं अन्य कचरे से समुद्र और समुद्री तटों को होने वाले नुकसान को कम करने तथा ऑनलाइन प्रतिज्ञा एवं विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करना इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को समुद्री एवं जलीय पर्यावरण के संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समुद्र और जल निकाय केवल पर्यावरण के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी सीधे जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के लिए केवल तटीय क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक गांव और विद्यालय में भी स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आवश्यक है।
इस अवसर पर उपस्थित स्टाफ सदस्यों में श्री अजय प्रकाश, श्री भूपेश कुमार, श्री महेंद्र सिंह, श्री विक्रम सिंह, श्री राजेश कुमार, श्री कपिल देव, श्री तिवारी शर्मा, श्री अजय कुमार, श्री संदीप कुमार, श्री तपेंद्र सिंह, श्रीमती विनिता देवी, आस्था शर्मा तथा समृति ठाकुर शामिल रहे।
प्रयास सोसाइटी की ओर से कहा गया कि ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ का संदेश केवल समुद्री क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। जल संरक्षण, स्वच्छता, प्लास्टिक प्रदूषण में कमी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश देश के प्रत्येक गांव और विद्यालय तक पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रयास सोसाइटी द्वारा विद्यार्थियों एवं समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता की जा रही है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छ, सुरक्षित एवं सतत पर्यावरण के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लिया।




दिल्ली में राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला में हिमाचल की प्रयास सोसाइटी ने लिया भाग

धीरज रमौल ने कहा - नागरिक समाज की भूमिका उपस्थिति से आगे बढ़कर सहभागिता और साझेदारी तक पहुंचे नई दिल्ली, 3 नवंबर। नागरिक समाज संगठनों के लिए...