सिरमौर 25 सितंबर। ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ (SSSS 5.0) अभियान के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरोग-बनेड़ी में आयोजित पर्यावरण संरक्षण प्रतिज्ञा कार्यक्रम के बाद प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने देशवासियों एवं प्रदेशवासियों से समुद्र, नदियों, झरनों और सभी जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
धीरज रमौल ने कहा कि समुद्र केवल तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन और पर्यावरण से उनका सीधा संबंध है। समुद्र पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता, जलवायु और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि समुद्रों को स्वच्छ रखने की शुरुआत हमारे घर, गांव और स्थानीय जल स्रोतों से होती है। यदि नदियों, नालों, खड्डों, झरनों और अन्य जल स्रोतों में कचरा एवं प्लास्टिक जाने से रोका जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण में दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण आज जल स्रोतों और पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती है। प्रत्येक नागरिक को एकल-उपयोग प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करने, कचरे का उचित निपटान करने और अपने आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
धीरज रमौल ने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाया जा सकता है। बच्चे और युवा भविष्य के जिम्मेदार नागरिक हैं और उनमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने देश एवं प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि “स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर का संदेश केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह संदेश हिमाचल के पहाड़ी गांवों के छोटे जलस्रोतों से लेकर देश की नदियों और समुद्रों तक पहुंचना चाहिए। जल की प्रत्येक धारा को स्वच्छ और सुरक्षित रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।”
उन्होंने कहा कि प्रयास सोसाइटी आगे भी विद्यार्थियों, शिक्षकों, समुदाय और आम नागरिकों की भागीदारी से जल संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण में कमी, पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देती रहेगी।
धीरज रमौल ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे केवल पर्यावरण संरक्षण की प्रतिज्ञा न लें, बल्कि उसे अपने दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाएं। यही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण की मजबूत नींव होगी।
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