Dinsdag 29 September 2026

बारिश के बदलते स्वरूप के बीच जल संरक्षण पर गंभीरता से काम करने की जरूरत : प्रयास सोसाइटी


प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के साथ वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की आवश्यकता

सिरमौर 29 सितंबर। बारिश के बदलते स्वरूप और जलवायु परिवर्तन के बीच आने वाले समय के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर प्रयास सोसाइटी ने जल संरक्षण के कार्यों को और मजबूत करने की आवश्यकता जताई है। संस्था का कहना है कि वर्षा जल का अधिक से अधिक संरक्षण, प्राकृतिक जलस्रोतों का पुनर्भरण और ग्रामीण स्तर पर सामुदायिक भागीदारी आज समय की महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है।
प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अनेक गांवों की पेयजल व्यवस्था प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर है। ऐसे में बारिश के पानी को सीधे बह जाने देने के बजाय उसे जमीन में उतारने और प्राकृतिक जलस्रोतों के रिचार्ज के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें पंचायतों, महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, किसानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। गांव स्तर पर छोटे-छोटे जल संरक्षण कार्य जैसे रिचार्ज पिट, कंटूर ट्रेंच, चेक डैम, वर्षा जल संचयन और जलस्रोतों के आसपास पौधरोपण लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
धीरज रमौल ने कहा कि संस्था पिछले कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक जलस्रोतों, वर्षा जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनजागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से कार्य कर रही है। बदलती परिस्थितियों को देखते हुए अब इन प्रयासों को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अपने आसपास मौजूद बावड़ियों, धारों, नालों, नौलों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखें तथा जलस्रोतों के आसपास कूड़ा-कचरा न डालें। साथ ही बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए घरों और खेतों के स्तर पर भी छोटे-छोटे उपाय अपनाए जाएं।
प्रयास सोसाइटी के अनुसार जल संरक्षण का सबसे प्रभावी तरीका स्थानीय परिस्थितियों और समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सामूहिक प्रयास करना है। यदि वर्षा जल का संरक्षण और प्राकृतिक जलस्रोतों का पुनर्भरण नियमित रूप से किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में भविष्य की जल चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Geen opmerkings nie:

Plaas 'n opmerking

दिल्ली में राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला में हिमाचल की प्रयास सोसाइटी ने लिया भाग

धीरज रमौल ने कहा - नागरिक समाज की भूमिका उपस्थिति से आगे बढ़कर सहभागिता और साझेदारी तक पहुंचे नई दिल्ली, 3 नवंबर। नागरिक समाज संगठनों के लिए...