Donderdag 27 Augustus 2026

साढ़े तीन साल से बिजली संकट की मार झेल रहा ददाहू-धारटीधार क्षेत्र

स्टाफ की कमी, बरसात में टूटती तारों और क्षतिग्रस्त पोलों से बढ़ी परेशानी; धीरज रमौल ने सरकार से नियमित कटाई-छंटाई, पर्याप्त कर्मचारियों और स्थायी समाधान की मांग की

सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के ददाहू और धारटीधार क्षेत्र में पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से बिजली की समस्या लगातार बनी हुई है। बार-बार बिजली गुल होने, बरसात के दौरान तारें टूटने और बिजली के पोल क्षतिग्रस्त होने तथा खराबी को ठीक करने में लगने वाले लंबे समय के कारण क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद अभी तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि बिजली की समस्या आने पर आम लोग अक्सर बिजली विभाग के फील्ड कर्मचारियों, जेई और एसडीओ को फोन करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि विभाग के कर्मचारी उपलब्ध संसाधनों के बीच अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं और लोगों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते हैं। इसलिए फील्ड में काम करने वाले छोटे कर्मचारियों को दोष देना समस्या का समाधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि असली समस्या व्यवस्था और पर्याप्त स्टाफ की कमी से जुड़ी हुई है। ददाहू और धारटीधार जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के मौसम में तेज हवाओं, भारी बारिश और पेड़ों के गिरने के कारण कई बार बिजली की तारें टूट जाती हैं तथा पोल भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण खराबी को ठीक करने में काफी समय लग जाता है।
धीरज रमौल ने कहा कि पहले बिजली की तारों के आसपास पेड़ों की बढ़ी हुई टहनियों की समय-समय पर कटाई-छंटाई की जाती थी, ताकि पेड़ों की शाखाएं तारों के संपर्क में आकर बिजली आपूर्ति में बाधा न बनें। लेकिन पिछले करीब पौने चार वर्षों से इस व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई स्थानों पर पेड़ों की टहनियां बिजली की तारों तक पहुंच चुकी हैं, जिससे बरसात और तेज हवाओं के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि समस्या केवल खराबी होने के बाद उसे ठीक करने की नहीं, बल्कि खराबी को रोकने के लिए पहले से तैयारी करने की है। यदि बिजली की तारों के आसपास पेड़ों की नियमित कटाई-छंटाई, पुराने एवं कमजोर पोलों की समय-समय पर जांच तथा आवश्यकतानुसार मरम्मत और बदलाव किया जाए, तो बिजली की कई समस्याओं को पहले ही रोका जा सकता है।
धीरज रमौल ने कहा कि ददाहू और धारटीधार क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग नौकरी, मजदूरी, कृषि और अन्य दैनिक कार्यों पर निर्भर हैं। शाम के समय बिजली चले जाने के बाद कई बार रातभर बिजली बहाल नहीं होती, जिससे घरेलू कार्यों, विद्यार्थियों की पढ़ाई, दुकानदारों, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में जब कहीं तार टूटती है या पोल गिरता है तो सीमित कर्मचारियों पर ही उसे ठीक करने का दबाव बढ़ जाता है। यदि विभाग के पास पर्याप्त तकनीकी स्टाफ, लाइनमैन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों तो ऐसी आपात स्थिति में बिजली आपूर्ति को कम समय में बहाल किया जा सकता है।
धीरज रमौल ने प्रदेश सरकार से सवाल किया कि पिछले करीब 40 महीनों में ददाहू और धारटीधार क्षेत्र की बिजली समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? उन्होंने कहा कि सरकार और बिजली विभाग को केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करने की व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय क्षेत्र की बिजली व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं और क्षेत्रवासियों की ओर से मुख्यमंत्री तथा बिजली विभाग के मंत्री को एक मांग पत्र भेजा जाए, जिसमें बिजली की तारों के आसपास पेड़ों की नियमित और समयबद्ध कटाई-छंटाई के लिए स्थायी व्यवस्था एवं नियमित टेंडर लगाने, पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति/उपलब्धता सुनिश्चित करने, बरसात से पहले बिजली लाइनों और पोलों का निरीक्षण करने, कमजोर पोलों को बदलने तथा आपातकालीन स्थिति में त्वरित मरम्मत दल उपलब्ध करवाने की मांग की जाए।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बरसात से पहले प्री-मानसून तैयारी को अनिवार्य किया जाना चाहिए। संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां अतिरिक्त स्टाफ और आवश्यक सामग्री उपलब्ध रखी जाए, ताकि तार टूटने या पोल गिरने की स्थिति में लोगों को लंबे समय तक बिजली संकट का सामना न करना पड़े।
धीरज रमौल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी कर्मचारी या अधिकारी को दोषी ठहराना नहीं है। फील्ड में काम करने वाले कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और विभाग के उच्च स्तर पर ऐसी प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे कर्मचारियों की कमी दूर हो और बिजली की समस्या का स्थायी समाधान हो।
उन्होंने कहा, “यदि समय रहते पेड़ों की टहनियों की कटाई-छंटाई, बिजली लाइनों और पोलों की नियमित निगरानी तथा पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी जाए, तो बिजली की कई बाधाओं को पहले ही रोका जा सकता है। बरसात में तार टूटने या पोल गिरने की स्थिति में भी पर्याप्त स्टाफ होने से बिजली आपूर्ति जल्द बहाल की जा सकेगी।”
प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने प्रदेश सरकार और बिजली विभाग से मांग की कि सिरमौर जिला के ददाहू और धारटीधार क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही बिजली समस्या को गंभीरता से लिया जाए। स्टाफ की कमी को दूर करने, बिजली लाइनों की नियमित देखरेख, पेड़ों की कटाई-छंटाई, कमजोर पोलों को बदलने तथा बरसात के दौरान त्वरित मरम्मत व्यवस्था को मजबूत कर लोगों को स्थायी एवं प्रभावी राहत प्रदान की जाए।

Dinsdag 25 Augustus 2026

क्यारी के ग्रामीणों की पुकार—गिरि नदी पर पुल कब बनेगा?

क्यारी के ग्रामीणों की पुकार—गिरि नदी पर पुल कब बनेगा?

ग्राम पंचायत छछेती के क्यारी गांव के ग्रामीण वर्षों से गिरि नदी पर स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

इस गंभीर समस्या को लेकर अखबार में प्रकाशित खबर के माध्यम से एक बार फिर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया है।

ग्रामीणों की मांग साफ है—अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहिए।
गिरि नदी पर जल्द से जल्द पुल का निर्माण किया जाए, ताकि क्यारी गांव के लोगों को बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से निजात मिल सके।

🙏 कृपया इस खबर को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि क्यारी के ग्रामीणों की आवाज सरकार और प्रशासन तक पहुंचे।

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धरती बचाने की मुहिम को मिला जनसहयोग

🌱 धरती बचाने की मुहिम को मिला जनसहयोग 🌳

ग्राम पंचायत भरोग बनेड़ी में प्रयास सोसाइटी द्वारा चलाए गए पौधारोपण अभियान की खबर आज अखबार में प्रकाशित हुई। इस अभियान में एनएसएस स्वयंसेवकों, अध्यापकों, स्थानीय ग्रामीणों एवं वन विभाग के कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

पर्यावरण संरक्षण में सराहनीय योगदान देने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों, अध्यापकों एवं वन विभाग के कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।

इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ग्राम पंचायत भरोग बनेड़ी के प्रधान रामगोपाल शर्मा, प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल, समन्वयक नरेश कुमार, एनएसएस स्वयंसेवकों, अध्यापकों, वन विभाग के कर्मचारियों एवं सभी सहयोगियों का हार्दिक आभार। 🙏

🌳 एक पेड़ लगाना यानी पृथ्वी के भविष्य को सुरक्षित करना।

💧 पेड़ बचाएं • पानी बचाएं • पृथ्वी बचाएं 🌍

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प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने लोगों से किया देशी बीजों और पारंपरिक फसलों के संरक्षण का आह्वान

प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने लोगों से किया देशी बीजों और पारंपरिक फसलों के संरक्षण का आह्वान

सिरमौर । प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने हिमाचल प्रदेश के लोगों, विशेषकर किसानों और ग्रामीण समुदायों से देशी बीजों एवं पारंपरिक फसलों के संरक्षण के लिए आगे आने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हमारे पारंपरिक बीज और फसलें केवल खेती का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की कृषि संस्कृति, जैव विविधता, स्थानीय ज्ञान और आने वाली पीढ़ियों की खाद्य सुरक्षा की अमूल्य धरोहर हैं।
धीरज रमौल ने कहा कि आधुनिक कृषि के बढ़ते प्रभाव के कारण कई पारंपरिक फसलें और स्थानीय बीज धीरे-धीरे खेतों से गायब होते जा रहे हैं। पहले गांवों में किसान अपनी फसलों के बीज स्वयं सुरक्षित रखते थे और एक-दूसरे के साथ बीजों का आदान-प्रदान भी करते थे। आज यह परंपरा कमजोर होती जा रही है, जिसके कारण कई स्थानीय किस्मों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
उन्होंने लोगों से निवेदन किया कि यदि किसी किसान या परिवार के पास पुरानी देशी मक्की, रागी, कुल्थ, चौलाई, कुट्टू, फाफरा, दालों अथवा अन्य पारंपरिक फसलों के बीज उपलब्ध हैं, तो उन्हें नष्ट न करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।
धीरज रमौल ने कहा कि विशेष रूप से सिरमौर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई परिवारों के पास पारंपरिक बीजों और खेती से जुड़ा पुराना ज्ञान मौजूद है। बुजुर्ग किसानों के पास बीजों को सुरक्षित रखने, बुवाई करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल उगाने का जो अनुभव है, उसे भी दर्ज किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर गांव में स्थानीय स्तर पर 'देशी बीज बैंक' बनाने की पहल की जा सकती है। इसमें किसानों द्वारा उपलब्ध करवाए गए पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रखा जाए और उनका संरक्षण एवं समय-समय पर पुनः उत्पादन किया जाए। इससे स्थानीय बीजों की अगली पीढ़ी तक निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने किसानों से यह भी अपील की कि पारंपरिक फसलों को केवल इसलिए न छोड़ें क्योंकि उनका बाजार सीमित है। यदि ग्रामीण समुदाय मिलकर इन फसलों का उत्पादन, प्रसंस्करण और स्थानीय स्तर पर बिक्री शुरू करे तो इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय खाद्य संस्कृति को भी मजबूत किया जा सकता है।
धीरज रमौल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और पानी की बढ़ती कमी के दौर में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पारंपरिक फसलों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। इसलिए देशी बीजों का संरक्षण भविष्य की कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
उन्होंने युवाओं, महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्कूलों से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को अपनी पारंपरिक फसलों और स्थानीय कृषि विरासत से जोड़ना समय की जरूरत है।
धीरज रमौल ने लोगों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा, “अपने घर में रखे पुराने देशी बीजों को संभालकर रखें। हो सकता है कि आज हमें उनका महत्व कम दिखाई दे, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए यही बीज हमारी सबसे बड़ी कृषि विरासत बन सकते हैं। एक किसान एक देशी बीज बचाए और उसे आगे बढ़ाए, तो हम मिलकर अपनी पारंपरिक कृषि को फिर से मजबूत कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि प्रयास सोसाइटी देशी बीजों और पारंपरिक फसलों के संरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने तथा सामुदायिक स्तर पर इस दिशा में प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है।

Woensdag 19 Augustus 2026

पर्यावरण योद्धाओं का सम्मान

🏆 पर्यावरण योद्धाओं का सम्मान
भरोग बनेड़ी में पौधारोपण अभियान के दौरान पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों, अध्यापकों और वन विभाग के कर्मचारियों को प्रयास सोसाइटी द्वारा स्मृति चिन्ह एवं प्रशंसा प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। 🙏🌱

प्रकृति की रक्षा के लिए अपना योगदान देने वाले सभी पर्यावरण योद्धाओं को दिल से सलाम। 🇮🇳

पेड़ बचाएं 🌳 | पानी बचाएं 💧 | पृथ्वी बचाएं 🌍

#प्रयाससोसाइटी #सम्मान #पर्यावरणयोद्धा #NSS #ForestDepartment #Environment

Maandag 17 Augustus 2026

शहीदों की स्मृति में पौधारोपण, फलदार-फूलदार पौधे लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

शहीदों की स्मृति में पौधारोपण, फलदार-फूलदार पौधे लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सिरसा । विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस तथा देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान शहीदों की स्मृति में सिरसा के एफ ब्लॉक में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 1947 के भारत विभाजन के दौरान हिंसा में जान गंवाने वाले लाखों निर्दोष नागरिकों तथा स्वतंत्रता संग्राम के महान शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनकी स्मृति में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए।
इस अवसर पर प्रयास सोसाइटी के स्वयंसेवक एवं समाजसेवी रंजीत सिंह ने कहा कि विभाजन की त्रासदी देश के इतिहास का एक ऐसा दर्दनाक अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। विभाजन के दौरान लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवाए और करोड़ों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। वहीं, देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, शहीद ऊधम सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और मदन लाल ढींगरा जैसे महान क्रांतिकारियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान देश की अमूल्य विरासत है और उनकी स्मृति को जीवंत रखना हम सभी का दायित्व है। पौधारोपण के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
पौधारोपण अभियान के दौरान फलदार, फूलदार और छायादार पौधे लगाए गए, जिनमें जामुन, अमरूद, गुड़हल और मोगरा आदि शामिल रहे। रंजीत सिंह ने कहा कि आज लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में वृक्ष बनकर समाज को फल, फूल, छाया और स्वच्छ वातावरण प्रदान करेंगे।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे शहीदों की स्मृति में अधिक से अधिक पौधे लगाएं और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि देश की एकता, भाईचारे, शांति और पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करना ही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

शहीदों को शत-शत नमन। जय हिंद!

हर घर तिरंगा अभियान के तहत तिरंगा मार्च में शामिल हुए प्रयास सोसाइटी के स्वयंसेवक रणजीत सिंह

हर घर तिरंगा अभियान के तहत तिरंगा मार्च में शामिल हुए प्रयास सोसाइटी के स्वयंसेवक रणजीत सिंह

सिरसा । स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में जिला प्रशासन सिरसा द्वारा हर घर तिरंगा अभियान के तहत शहीद भगत सिंह स्टेडियम, बरनाला रोड, सिरसा से तिरंगा मार्च का आयोजन किया गया। इस तिरंगा मार्च में विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शहरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रयास सोसाइटी के स्वयंसेवक रणजीत सिंह ने भी तिरंगा मार्च में शामिल होकर देशभक्ति का संदेश दिया।

 हमारे देश की आजादी असंख्य वीर स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद सहित हजारों ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उस्वतंत्रता आंदोलन ने देशवासियों को एकजुट किया और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष की भावना को मजबूत किया। महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग एवं सविनय अवज्ञा आंदोलन, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज तथा अनेक क्रांतिकारियों के संघर्ष ने स्वतंत्रता की राह को मजबूत किया।

हमारे शहीद देश का गौरव हैं और उनकी कुर्बानियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। तिरंगा केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता, स्वतंत्रता और गौरव का प्रतीक है।

उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, पौधारोपण, नशे के विरुद्ध अभियान,  स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के लिए अपना योगदान दें।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने देशभक्ति के नारे लगाएं। 

भारत माता की जय
🇮🇳 जय हिंद! वंदे मातरम्!


विज्ञान के साथ संस्कार और प्रकृति का सम्मान ही बनाएगा हिमाचल का उज्ज्वल भविष्य : धीरज रमौल

विज्ञान के साथ संस्कार और प्रकृति का सम्मान ही बनाएगा हिमाचल का उज्ज्वल भविष्य : धीरज रमौल आधुनिक तकनीक अपनाएं, लेकिन अपनी जड़ों से रिश्ता न...