सिरमौर, 30 सितंबर। अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के अवसर पर प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने कहा कि अनुवाद केवल एक भाषा के शब्दों को दूसरी भाषा में बदलने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, समाजों और विचारों को आपस में जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
धीरज रमौल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे विविधतापूर्ण राज्य में स्थानीय भाषाओं, बोलियों, लोक साहित्य, लोक परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान का विशेष महत्व है। ग्रामीण क्षेत्रों में पीढ़ियों से संचित जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, औषधीय पौधों तथा स्थानीय संसाधनों से संबंधित ज्ञान को सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान, तकनीक और आधुनिक ज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी को सरल हिन्दी तथा स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध करवाने से किसानों, विद्यार्थियों, युवाओं और ग्रामीण समुदायों को इसका अधिक लाभ मिल सकता है। इसी प्रकार ग्रामीण समाज के पारंपरिक अनुभवों और स्थानीय ज्ञान को भी व्यापक स्तर तक पहुंचाने में अनुवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
धीरज रमौल ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान, संस्कृति और विरासत का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए स्थानीय भाषाओं और बोलियों के संरक्षण के साथ-साथ विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाषा के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान जितना अधिक होगा, समाज में समझ, सहयोग और आपसी जुड़ाव भी उतना ही मजबूत होगा।
उन्होंने युवाओं, शिक्षकों, साहित्यकारों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों से आह्वान किया कि वे स्थानीय इतिहास, संस्कृति, लोक परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को लिखित एवं डिजिटल रूप में सुरक्षित करने के प्रयास करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ी रह सकें।
अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस के अवसर पर प्रयास सोसाइटी ने सभी भाषा विशेषज्ञों, अनुवादकों, साहित्यकारों, शिक्षकों और भाषा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के योगदान को सराहा तथा समाज में भाषायी समन्वय और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का संदेश दिया।